राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची गुमला, जन सांस्कृतिक समागम कार्यक्रम में शामिल हुईं

अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम में सम्मिलित होने झारखंड के गुमला पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु। गुमला के रायडीह प्रखंड अंतर्गत माझाटोली स्थित बैरियर बगीचा परिसर में पंखराज साहेब कार्तिक उरांव आदिवासी शक्ति स्वायतशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति द्वारा आयोजित अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन के साथ लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है।

मंच पर पहुंचते ही उन्होंने ‘जोहार’ से जनसमूह का किया अभिवादन। जैसे ही उन्होंने जोहार से जनसमूह का अभिवादन किया पूरा पंडाल तालिया की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। लोग अपने जनजाति की महिला राष्ट्रपति के स्वागत के लिए सम्मिलित हुए थे।

महामहिम राष्ट्रपति ने बलिदानियों को किया याद

माननीय राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड की धरती वीर बलिदानियों की धरती है, जिनके योगदान और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि “शिक्षा विकास की सबसे बड़ी पूंजी है और यही समाज को सही दिशा देती है। “इसके बावजूद आज भी जनजातीय समाज शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे है, इसलिए उन्हें आगे लाने के लिए सामूहिक प्रयास करना जरूरी है।”जल्द शुरू होगा विश्वविद्यालय का निर्माण उन्होंने विश्वविद्यालय के निर्माण कहा कि यहां प्रस्तावित विश्वविद्यालय का निर्माण जल्द होगा, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होगी। कार्यक्रम के दौरान संयोजक शिवशंकर उरांव राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिए जाने की घोषणा की, जिस पर राष्ट्रपति ने विनम्रता से कहा कि ‘उन्हें लोगों के बीच बेटी और बहन के रूप में जाना अधिक अच्छा लगता है’।

सांस्कृतिक आयोजन समाज को जड़ों से जोड़ता है: राज्यपाल संतोष गंगवार

अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनके राज्य में विकास की गति तेज हुई है और शिक्षा के साथ विकास को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है और समाज शांति की ओर बढ़ रहा है। समारोह में विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य-गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा परिसर सांस्कृतिक रंग से सराबोर हो गया।

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