
Bokaro, चास: किसी प्रशासनिक भवन के सामने अगर कोई लावारिस बोरा दिख जाए, तो अमूमन सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच जाता है। लेकिन चास नगर निगम दफ्तर के बाहर रखे एक बोरे ने दहशत नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक गहरा ‘व्यंग्य’ पैदा कर दिया है। यह बोरा किसी हमले की साजिश नहीं, बल्कि निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के खिलाफ एक आम नागरिक का ‘शांतिपूर्ण विद्रोह’ है।
अनोखा विरोध, कड़ा संदेश
बोरे पर चिपकाए गए पर्चे में साफ शब्दों में लिखा गया है कि चीरा चास इलाके में लंबे समय से कचरे का उठाव नहीं हो रहा है। थक-हारकर एक जागरूक नागरिक ने वह कचरा सीधे निगम कार्यालय के बाहर लाकर रख दिया। संदेश में छिपे तंज ने अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर शहर साफ नहीं हो सकता, तो कम से कम निगम का द्वार तो साफ होगा ही, वहीं हमारा कचरा भी ठिकाने लग जाएगा।
ये है सन्देश
“Chira Chas के किसी भी इलाके से कचरा नहीं लिया जा रहा। तो कचरा फेंकने का सबसे सही स्थान चास MNC लगा। क्योंकि यहाँ तो हर दिन सफाई होता होगा। तो अपने कचरे के साथ हमारा कचरा भी कहीं ना कहीं Dump कर ही देंगे।
-एक आम नागरिक।”
बदलती जन-चेतना का प्रमाण
यह घटना बताती है कि आज का आम आदमी सिर्फ दफ्तरों के चक्कर काटकर चुप बैठने वाला नहीं है। वह आला अधिकारियों का ध्यान खींचने के लिए ‘हैरतअंगेज’ और रचनात्मक तरीके अपनाना जानता है। यह विरोध प्रदर्शन का एक ऐसा तरीका है जहाँ बिना किसी शोर-शराबे के प्रशासन की जवाबदेही तय की गई है।
यह घटना नगर निगम के लिए एक चेतावनी है। यदि मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता को इस तरह के प्रतीकात्मक और कड़वे रास्ते अपनाने पड़ें, तो यह प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब देखना यह है कि निगम इस ‘कचरे वाले संदेश’ से कितनी जल्दी अपनी कार्यशैली की सफाई करता है।

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