भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस विकास के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो रहा है—क्या इस तरक्की का फायदा सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंच रहा है? विशेषज्ञों और सामाजिक अध्ययनों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में आर्थिक असमानता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जहां अमीर वर्ग और अधिक संपन्न होता जाएगा, जबकि गरीब वर्ग के लिए आगे बढ़ना और कठिन हो सकता है।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि जिन लोगों के पास पहले से जमीन, शेयर, बिज़नेस और अन्य संपत्तियां हैं, उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ रही है। वहीं, गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग अब भी केवल मासिक आय पर निर्भर हैं और उनके लिए संपत्ति बनाना आसान नहीं है।
शिक्षा और कौशल का अंतर
शिक्षा और कौशल का अंतर भी इस खाई को चौड़ा कर रहा है। बेहतर शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और अंग्रेज़ी भाषा की समझ आज बेहतर नौकरियों की कुंजी बन चुकी है, लेकिन यह सुविधाएं अब भी समाज के सीमित हिस्से तक ही पहुंच पाई हैं। वहीं, महंगाई का असर गरीब वर्ग पर कहीं अधिक पड़ता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन, किराया और इलाज में खर्च हो जाता है।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। डिजिटल इंडिया, सस्ता इंटरनेट और यूपीआई जैसी सुविधाओं ने नए अवसर खोले हैं। आज छोटे शहरों और गांवों से भी लोग ऑनलाइन काम, फ्रीलांसिंग और डिजिटल कारोबार के जरिए आय अर्जित कर रहे हैं।
इसके साथ ही सरकार की योजनाएं जैसे—डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन और जनधन योजना—ने अत्यधिक गरीबी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सबसे ज्यादा दबाव मध्यम वर्ग पर रहेगा। आय बढ़ने की रफ्तार धीमी है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन यापन की लागत लगातार बढ़ रही है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, भारत में गरीबी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन अत्यधिक गरीबी में कमी आई है। इसके बावजूद, अगर शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों तक समान पहुंच नहीं बनाई गई, तो अमीर और गरीब के बीच की दूरी और बढ़ सकती है।
आज के दौर में सफलता की कुंजी साफ है—कौशल, तकनीक और बदलते समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता। बिना इसके, आर्थिक असमानता का यह फासला और गहरा हो सकता है।

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