धीमा जहर पी रहे ग्रामीण, खरवार टोला बना बीमारी की प्रयोगशाला

फ्लोराइडयुक्त पानी ने उजाड़ रहीं पीढ़ियां, जन्म से ही दिव्यांग हो रहे बच्चे
दशकों से स्थाई बदहाली दूर होने का इंतजार कर रहे ग्रामीण
लातेहार : सरकारी स्वास्थ्य और स्वच्छ पेयजल योजनाओं के बावजूद लातेहार सदर प्रखंड के पोचरा पंचायत अंतर्गत जारम गांव का खरवार टोला आज भी गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। लगभग 90 से 100 की आबादी वाले इस टोले में वर्षों से फ्लोराइडयुक्त और दूषित पानी लोगों के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। हालात इतने भयावह हैं कि पूरा टोला हड्डी रोग और दिव्यांगता की चपेट में आ चुका है।
अब भी कुंए का पानी पीने को विवश हैं लोग
टोले में सोलर जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद आज भी कुछ लोग मजबूरी में कुंए का पानी पी लेते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुंए से निकलने वाला पानी गर्म होता है, जिससे उसके दूषित होने की आशंका और गहराती है। लंबे समय तक इस पानी के सेवन ने लोगों के शरीर पर गंभीर असर डाला है।
दस से अधिक लोगों के हैं हाथ-पैर टेढ़े
खरवार टोले में दस से अधिक लोग ऐसे हैं जिनके हाथ-पैर टेढ़े हो चुके हैं और वे सामान्य रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बीमारी का दायरा इतना बढ़ चुका है कि एक ही घर में कई-कई परिवार इसकी चपेट में हैं।
इन लोगों पर बीमारी का गंभीर असर
टोले में कृष्णकांत सिंह, सोबतिया देवी, फुलमनिया देवी, मुनिता कुमारी, सुशीला कुमारी, विशेसर सिंह, प्रमिला देवी, सुनीता देवी, राजमणी देवी और लालमन सिंह गंभीर रूप से प्रभावित हैं। एक घर में चार परिवार प्रभावित हैं, जिनमें फुलमनिया देवी, विशेसर सिंह, सुशीला कुमारी और मुनिता कुमारी शामिल हैं। एक अन्य घर में तीन परिवार सोबतिया देवी, सुष्मिता कुमारी और लालमन सिंह बीमारी से जूझ रहे हैं। एक घर में अकेले कृष्णकांत सिंह इस बीमारी के शिकार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार दूषित पानी पीने के कारण नई पीढ़ी भी सुरक्षित नहीं है और बच्चे जन्म से ही शारीरिक रूप से कमजोर या दिव्यांग हो रहे हैं।
सोलर पानी टंकी से मिली आंशिक राहत
गांव में अलग-अलग टोलों के लिए सोलर पानी टंकी लगाई गई है। हालांकि इनमें से कुछ टंकियां खराब हैं। जो टंकियां चालू हैं, उन्हीं के पानी का उपयोग ग्रामीण कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सोलर टंकी की व्यवस्था से काफी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह स्थाई और पूरी तरह पर्याप्त नहीं है।
गर्म कुंड बना बीमारी की जड़
ग्रामीणों के अनुसार गांव के पास स्थित ततहा गर्म कुंड इस समस्या की बड़ी वजह है। माना जाता है कि इसमें फ्लोराइड और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा अधिक है, जिसका असर आसपास के भूजल स्रोतों पर पड़ा है। यही कारण है कि वर्षों तक हैंडपंप और कुंए का पानी पीना लोगों के लिए घातक साबित हुआ।
ग्रामीणों की मांग स्थाई समाधान हो :
ग्रामीणों ने प्रशासन से खरवार टोले में शुद्ध पेयजल की स्थाई व्यवस्था, खराब सोलर टंकियों की मरम्मत, नियमित पानी की जांच, स्वास्थ्य जांच शिविर और प्रभावित लोगों के समुचित इलाज की मांग की है। सवाल यह है कि आखिर कब तक गांव के लोग इस धीमे जहर के साथ जीने को मजबूर रहेंगे।
गांव में दूषित पानी के कारण समस्या है। पानी की समस्याओं से राहत के लिए सोलर टंकी से लाए पानी को भी उबाल कर पीएं तो अच्छा रहेगा। एक मेडिकल टीम को गांव में ग्रामीणों का इलाज करने के लिए भेजूंगा
-डा. राजमोहन खलखो, सिविल सर्जन लातेहार।

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