हाल ही में जिस तरह से टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हिरासत में लिया, उससे एक बात तो साफ हो जाती है कि जो देश दूसरों की टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह निर्भर होते हैं, उन्हें कभी भी दबाव में लाया जा सकता है। केवल गूगल या किसी एक कंपनी पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए खतरे की घंटी है। अगर अपने देश की बात करें तो न सिर्फ गूगल, बल्कि फेसबुक, व्हाट्सएप, लिंक्डइन जैसे कई विदेशी एप्लिकेशन हैं, जिनका इस्तेमाल देश का लगभग हर नागरिक करता है। यहां तक कि लोग गूगल पे जैसे प्लेटफार्म से अपने बैंक अकाउंट तक लिंक कर चुके हैं। यह सुविधा तो है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा और डिजिटल आत्मनिर्भरता का सवाल भी खड़ा होता है। इसलिए जरूरी है कि भारत केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता न बने, बल्कि उसका निर्माण करें। स्वदेशी AI, सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना समय की मांग है, इससे अवसर, सुरक्षा और आर्थिक विकास में तेजी मिलेगी तभी भारत सच मायनों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर शक्तिशाली बन सकेगा।

इक्कीसवीं सदी को टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सदी कहा जा रहा है। आज दुनिया की ताकत केवल हथियारों या सैनिकों से नहीं, बल्कि डेटा, टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षमता से तय हो रही है। ऐसे समय में भारत का AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ना न केवल गर्व की बात है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और समृद्धि के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और 12 भारतीय AI स्टार्टअप्स के साथ जो बैठक हुई है, इससे एक बार फिर AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के हौसले में नई ऊर्जा भर दी है। इस बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार स्टार्टअप, नवाचार और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है। भारत में आज बड़ी संख्या में युवा टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और AI जैसे विषयों में छात्रों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इन युवाओं को सही अवसर न मिलने के कारण विदेश चले जाते है | यह एक अच्छा संकेत है, देश की असली ताकत देश के युवा को देश में ही सही दिशा, संसाधन और अवसर मिले, तो वे भारत को टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं।
हालांकि भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी हम कई मामलों में विदेशी कंपनियों और प्लेटफार्म पर निर्भर हैं। आज हमारे रोजमर्रा के जीवन में गूगल, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन जैसे विदेशी ऐप्स गहराई से जुड़े हुए हैं। लोग इन्हीं प्लेटफॉर्म से बात करते हैं, काम करते हैं, पढ़ते हैं और व्यापार करते हैं। यहां तक कि गूगल पे जैसे डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म से लोग अपने बैंक खातों को जोड़ चुके हैं। इन सभी प्लेटफार्मों के उपयोग के लिए देश से बढ़ी रकम विदेश चली जा रही है जिससे देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।
हमारा डाटा कहां जा रहा है?
विदेशी कंपनियों के ऐसे प्लेटफॉर्म के उपयोग करने से मन में कई सवाल आते हैं—हमारा डाटा कहां जा रहा है? कौन इसका इस्तेमाल कर रहा है? और किस उद्देश्य से कर रहा है? एक बात साफ है कि टेक्नोलॉजी केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि शक्ति का भी साधन है। जिन देशों के पास मजबूत टेक्नोलॉजी और डेटा की ताकत होती है, वे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। वही, जो देश दूसरों की टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह निर्भर होते हैं, उन्हें कभी भी दबाव में लाया जा सकता है। इसलिए डिजिटल आत्मनिर्भरता किसी भी देश की संप्रभुता से जुड़ा हुआ विषय बन चुका है।
भारत के लिए यह जरूरी है कि वह केवल विदेशी टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाला देश न बने, बल्कि अपनी स्वदेशी टेक्नोलॉजी विकसित करे। “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियान इसी दिशा में उठाए गए कदम है लेकिन सरकार अब स्टार्टअप्स को फंडिंग, टैक्स में छूट, आसान नियम और टेक्नोलॉजी पार्क जैसे कई तरह की सुविधाएं दे। AI, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत को तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत ने कुछ क्षेत्रों में अच्छी शुरुआत की है। UPI आज दुनिया के सबसे सफल डिजिटल पेमेंट सिस्टम में से एक है। को-विन ऐप ने कोविड के समय वैक्सीनेशन को आसान बनाया था। आधार, डिजिलॉकर और आरोग्य सेतु जैसे प्लेटफॉर्म ने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत किया है। यह दिखाता है कि अगर सरकार और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ मिलकर काम करें, तो भारत विश्व स्तर की डिजिटल सेवाएं बना सकता है। भविष्य में भारत को सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण में भी आत्मनिर्भर होना होगा, क्योंकि आज की हर टेक्नोलॉजी—मोबाइल, कंप्यूटर, कार, मिसाइल, सैटेलाइट—चिप पर ही चलती है। अगर चिप का कंट्रोल किसी और देश के पास होगा, तो हमारी टेक्नोलॉजी भी उसी पर निर्भर रहेगी। इसलिए सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन भारत के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि AI और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के सामने अपार संभावनाएं हैं। देश के पास युवा शक्ति है, दिमागी ताकत है और यदि सरकारी समर्थन के साथ-साथ सही नीति, सच्चा प्रयास और स्वदेशी सोच हो तो भारत केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का नेतृत्व करने वाला देश बनेगा। यही सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और विकसित भारत की पहचान होगी।
Writer’s Information
लेखक मूलत राँची के रहने वाले हैं, बच्चों के अधिकार, शिक्षा एवं आई0टी0 क्षेत्र कार्य करने का अनुभव रखते है, इस क्षेत्र पर अपनी लेखन शैली से समाज को नई दिशा देने एवं अपने नयी विचारों को प्रस्तुत करते रहते हैं। उनके लेख समय-समय पर कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।


भारत अभी बहुत पीछे है, वाकई देश को बहुत तेज गति से आगे बढ़ना होगा। ट्रंप जैसा सनकी है कुछ भी कर सकता है।
You are write perfectly and aware the society
Good job