
बोकारो: झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना के इतिहास में स्वर्गीय छत्र राम महतो का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता के बीच से निकले ऐसे जननायक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन झारखंडी अस्मिता, सामाजिक न्याय, ईमानदार राजनीति और आम आदमी के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
स्व. छत्र राम महतो का व्यक्तित्व सादगी, संघर्ष और सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण था। उनका दरवाजा हर किसी के लिए खुला रहता था—चाहे वह किसान हो, मजदूर हो या छात्र। यही कारण था कि लोग उन्हें नेता से अधिक अपना अभिभावक मानते थे। सत्ता में रहते हुए भी वे जमीन से जुड़े रहे और आम जन की समस्याओं को प्राथमिकता देते रहे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने गोमिया विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। बिहार सरकार में वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी सत्ता को निजी लाभ का साधन नहीं बनने दिया। वे मानते थे कि राजनीति का वास्तविक उद्देश्य सेवा, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय है।
स्व. छत्र राम महतो का जीवन निरंतर संघर्षों से होकर गुजरा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। शिक्षा, सड़क, पानी, रोजगार और ईमानदार प्रशासन जैसे मुद्दे हमेशा उनके एजेंडे में रहे। वे जनआंदोलनों से निकले नेता थे और अंतिम समय तक जनता के बीच सक्रिय रहे।
उनका मानना था कि सच्चा नेता वही होता है जो आगे खड़े होकर नेतृत्व करे और कठिन समय में जनता के साथ खड़ा रहे। सादा रहन-सहन, अनुशासित जीवन और स्पष्ट विचारधारा ने उन्हें जनमानस में विशेष स्थान दिलाया।
आज भले ही स्व. छत्र राम महतो हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनकी स्मृति में 21 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाला प्रतिमा अनावरण समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनकी जनसेवा और झारखंडी अस्मिता के प्रति समर्पण को नमन करने का अवसर होगा।
स्व. छत्र राम महतो की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी और झारखंड के राजनीतिक-सामाजिक इतिहास में उनका नाम सदैव आदर के साथ लिया जाएगा।

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