
हर दिन अखबारों के किसी पृष्ठ में सड़क दुर्घटना का खबर देखने को मिल जाती है। साधारणतः अखबार वाले प्रथम पृष्ठ में ऐसे खबरों को छापने की अहमियत नहीं देते है लेकिन कई बार दुर्घटना इतना भयावक होती है, इतने लोगों की जान जाती है कि अखबारों के प्रथम पृष्ठ में खबरें छापने को मजबूर होना पड़ता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट की माने तो देश भर सड़क दुर्घटना से हुई मौत की संख्या 2015 में 146133 से बढ़कर 2025 में 160000 से अधिक हुई है, यानी हर साल एक प्रतिशत की बढ़ोतरी, यानी अब हर दिन 438 से ज्यादा लोगों की मौत सड़क हादसे से हो रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ही एक रिपोर्ट की माने तो सड़क दुर्घटनाओ में 2015 में 501423 से घटकर 2025 में 450000 हो गई है। इससे स्पष्ट होता है कि पहले सड़क दुर्घटना छोटे मोटे होते थे लेकिन अब जोरदार होती है जहां लोगों को बचने का मौका ही नहीं मिलती है। इससे एक बात तो स्पष्ट होती है कि शायद पहले लोगो के पास साधारण बाइक हुआ करता था या सड़क खराब होने के कारण धीरे चलते थे या घर के सिर्फ वयस्क ही चलाते थे।
अब आप कहेंगे कि जनसंख्या बढ़ी और पहले के अपेक्षा बाईकों की संख्या बढ़ी तो हादसे होगी, मौतें भी ज्यादा हो रही है। लेकिन यह कहना बिल्कुल गलत होगा क्योंकि हादसे 2015 के अपेक्षा काफी घटी है। इसका मतलब यह है कि अब लोग ट्रैफिक नियमों को नहीं मानते है। सड़कों के अच्छे हो जाने के कारण अब बाइक राइडर तेज रफ्तार से चलना पसंद करते है।
हेलमेट न पहनकर चलना तो आज के युवाओं का फैशन बन गया है। सोशल मीडिया में लोकप्रिय होने के लिए स्टंट करने का जो भूत सवार है यही है वो तीन चार कारण को सड़क दुर्घटना को छोटे से बड़े बना दिया है।
दुनिया के सबसे विकसित देश अमेरिका में वर्ष2025 में सड़क हादसे के कारण कुल 24776 लोगों की जान गई है, जो हमारे देश से 84.5 प्रतिशत कम है, क्योंकि वहां के लोग यातायात नियमों से जागरूक है और नियमों का पालन करते हैं।

केस 1–
ऋषिका कुमारी, उम्र 13 वर्ष
जिसकी मौत बस के चपेट में आ जाने से सितंबर 2025 में हो गई । अब सोचने वाली बात यह है कि महज 13 साल की बच्ची स्कूटी चला रही थी और गलत साइड से बस को ओवरटेक कर रही थी जिससे वो बस के चपेट में आ गई और मौके पर ही मौत हो गई। भले जनता ने सरकार को दोषी करार दे दिया हो लेकिन गलती मां बाप की भी थी जो इन नाजुक हाथों में स्कूटी थमा दिया था और इस मासूम बच्ची की भी जिसे पता नहीं था कि ओवरटेक कब और किस साइड से करनी चाहिए।
केस 2–
किशोर महतो, उम्र 25 साल
जिसकी मौत ट्रक के चपेट में आने से हो गई। 14 जनवरी को मेला से लौट रहे किशोर ने अत्याधिक नशे का सेवन कर रखा था और बाइक तेज रफ्तार से चला रहा था बस संतुलन बिगड़ी और ट्रक के चपेट में आ गया, इलाज के दौरान मौत हो गई।
ऐसे एक नहीं दो नहीं लाखों घटना है जो ट्रैफिक नियमों का धज्जियां उड़ाते दिख जाएंगे और मौत की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार को थोप देंगे। लेकिन असल में यह कोई सड़क हादसा नहीं बल्कि आत्महत्या करना है या मर्डर करने जैसा है।
आज मेरा सवाल सरकार से नहीं बल्कि जनता से है, कि यदि हम बाइक या कार धीरे चलाये तो क्या अपने गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंचेंगे? क्या हेलमेट या सीट बेल्ट पहन ले तो हम अच्छे नहीं दिखेंगे ? क्या हम स्टंट नहीं करे तो लोकप्रिय नहीं होंगे ? उन मां–बाप से भी एक सवाल किया जाना चाहिए कि क्या आपको अपने बच्चे प्यारे नहीं लगते है यदि लगते है तो इतना कम उम्र में बाइक–कार क्यों दे देते हैं। उन्हें हेलमेट पहनने के लिए क्यों नहीं प्रेरित करते हैं। नशे में गाड़ी चलाने से क्यों मना नहीं करते है। तेज रफ्तार से गाड़ी चालने वाले बच्चों को डांट क्यों नहीं पड़ती है? क्या इन सभी चीजों की भी जिम्मेदारी सरकार की है? नहीं, बिल्कुल नहीं, यातायात नियमों का पालन करना हम सभी का है तभी हमारे घर के चिराग के जान बचेंगे।
नोट- यह आलेख लेखक के अपने विचार हैं.

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