
बोकारो के सेक्टर-6 थाना क्षेत्र स्थित डंपिंग यार्ड के सामने एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, झाड़ियों और कचरे के बीच हजारों की संख्या में वोटर आईडी कार्ड, विभिन्न बैंकों के ATM कार्ड एवं पैन कार्ड बिखरे पड़े मिले
स्थानीय लोगों की नज़र इसपर उस वक्त गई जब वहां के लोग नहाने उस रास्ते से होकर जा रहे थे। आसपास गुजरने के दौरान इन कार्डों को देखा, तो लोगों में हड़कंप मच गया।
खड़े हो रहे हैं बड़े सवाल
पहली नजर में यह सिर्फ लापरवाही लग सकती है, लेकिन जिस मात्रा में दस्तावेज मिले हैं, उसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर इतने संवेदनशील पहचान पत्र एक साथ यहां कैसे पहुंचे? क्या किसी एजेंसी या बैंक की भारी चूक है, या फिर यह किसी बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का हिस्सा हो सकता है?
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इन दस्तावेजों में लोगों की निजी पहचान हैं, इन दस्तावेजों में बैंकिंग और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मौजूद होती है। आज के दौर में एक ATM कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराध या बैंक फ्रॉड, फर्जी सिम एक्टिवेशन, ऑनलाइन ठगी और पहचान चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन कार्डों को इस्तेमाल के बाद सबूत मिटाने के लिए फेंका गया?
या फिर किसी डेटा कलेक्शन नेटवर्क द्वारा लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया?
यदि ऐसा है, तो यह सिर्फ बोकारो नहीं बल्कि पूरे झारखंड के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों का खुले में पड़े मिलना प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़ा करता है। अगर समय रहते किसी असामाजिक तत्व के हाथ ये दस्तावेज लग जाते, तो कई लोगों के बैंक खाते और पहचान खतरे में पड़ सकते थे।
यह मामला सीधे तौर पर व्यक्ति के डेटा सुरक्षा, बैंकिंग गोपनीयता और नागरिक पहचान की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है जरूरत है कि सेक्टर-6 थाना, जिला प्रशासन, चुनाव आयोग और संबंधित बैंक तत्काल संयुक्त जांच करें साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि आखिर ये कार्ड यहां तक पहुंचे कैसे और इसके पीछे कौन लोग है।


