
बोकारो : गुरुवार को बोकारो दौरे पर पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन। विस्थापितों की स्थिति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
नयामोड़ स्थित बिरसा चौक में ‘धरती आबा’ को नमन करने के बाद उन्होंने प्रेस से बातचीत में कहा कि आजादी के बाद देश के निर्माण में बोकारो के विस्थापितों ने अपनी जमीन और आजीविका तक कुर्बान कर दी, लेकिन आज उनकी हालत बेहद दयनीय है। उन्होंने बताया कि बोकारो स्टील प्लांट के लिए करीब 37 हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिसमें से केवल सात हजार एकड़ पर ही प्लांट स्थापित हुआ, जबकि शेष जमीन या तो खाली पड़ी है या अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है। राज्य के भूमि अधिग्रहण कानून का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए जमीन ली गई, यदि उसका उपयोग नहीं हुआ तो उसे मूल रैयतों को वापस किया जाना चाहिए, लेकिन बोकारो में इस कानून की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि
बोकारो स्टील, सीसीएल और इलेक्ट्रोस्टील जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के विस्थापितों की हालत लगभग एक जैसी है। जमीन देने वाले आज रोजगार के लिए भटक रहे हैं और उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। प्रेम प्रसाद महतो के बारे में बोले सोरेन
उन्होंने प्रेम प्रसाद महतो की आंदोलन के दौरान हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कंपनी प्रबंधन ने जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए, जबकि एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। चंपई सोरेन ने कहा कि विस्थापितों ने जमीन उद्योग लगाने के लिए दी थी, न कि केवल मुनाफा कमाने के लिए। इसलिए प्रबंधन को चाहिए कि सभी प्रशिक्षित विस्थापितों को स्थायी रोजगार दे और जो अप्रशिक्षित हैं, उन्हें प्रशिक्षण देकर नियोजित किया जाए।
दे दी आंदोलन की चेतावनी
चंपई सोरेन ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रबंधन विस्थापितों को नियोजन, पुनर्वास और उचित मुआवजा नहीं देता है तो जमीन वापस करनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही बोकारो में विस्थापित खुद हल लेकर खाली पड़ी जमीन पर खेती शुरू करेंगे और तब प्रशासन व प्रबंधन से पूछा जाएगा कि भूमि अधिग्रहण कानून का पालन क्यों नहीं हो रहा है। उन्होंने अपने पूर्व आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि यूरेनियम कॉरपोरेशन के मामले में भी उन्होंने संघर्ष कर छोटे भूखंड वालों को नौकरी दिलाई थी। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि यह मुद्दा केवल बोकारो तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के विस्थापितों से जुड़ा है, इसलिए सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने बोकारो ट्रेजरी में हुए फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की भी मांग की।

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