
बोकारो, झारखंड: “पानी रे पानी तेरा रंग कैसा…?” – यह फिल्मी गाना आज बोकारो स्टील प्लांट के गेट नंबर 3 स्थित जोशी कॉलोनी के निवासियों के लिए एक कड़वी हकीकत बन चुका है। यहाँ पानी का रंग सुविधा नहीं, बल्कि विवशता तय कर रही है। भीषण गर्मी के इस दौर में जोशी कॉलोनी के 100 से अधिक परिवार बूंद-बूंद पानी के संघर्ष कर रहे हैं।
छूट रही है बच्चों की पढाई और उड़ रही महिलाओं की नींद
जोशी कॉलोनी की स्थिति के बारे में स्थानीय महिलाएं बताती हैं की उन्हें रात के 2:00 बजे से ही पानी की कतार में लगना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद सुबह 5:00 बजे तक मात्र एक गैलन पानी नसीब हो पाता है। यदि थोड़ी भी देरी हुई, तो फिर पूरे दिन कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
इस जल संकट का सबसे बुरा प्रभाव बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। स्थानीय बच्चों का कहना है कि उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर दिन भर पानी भरने में समय बिताना पड़ता है, ताकि परिवार की प्यास बुझ सके।
प्लांट के गंदे पानी का सहारा
पेयजल का संकट इतना गहरा है कि लोग बोकारो स्टील प्लांट से निकलने वाले प्रदूषित और गंदे पानी का उपयोग नहाने और कपड़े धोने के लिए करने को मजबूर हैं। पीने के पानी के नाम पर पूरी कॉलोनी प्लांट से निकलने वाले मात्र एक नल पर टिकी है। सरकारी चापाकल लंबे समय से खराब पड़ा था, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गई थीं।
‘बेहतर झारखंड’ की सराहनीय पहल: एक सप्ताह में बदलेगी सूरत
इस मानवीय संकट की सूचना लगातार #BehtarJharkhand की टीम को मिल रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को संस्था की टीम ने जोशी कॉलोनी का दौरा किया और वस्तुस्थिति का जायजा लिया।
संस्थान ने उठाए त्वरित कदम:
- तत्काल राहत: टीम ने मौके पर पहुँचकर कॉलोनी वासियों से ज्ञापन लिया और महीनों से खराब पड़े सरकारी हैंडपंप को तत्काल प्रभाव से ठीक करवाया।
- स्थायी समाधान: संस्था ने घोषणा की है कि एक सप्ताह के भीतर यहाँ नया मोटर, पाइप और पानी की टंकी लगाकर एक स्थायी जलमीनार का निर्माण कराया जाएगा।
“हम पानी के लिए रात-रात भर जागने को मजबूर थे, लेकिन अब उम्मीद जगी है। खराब हैंडपंप का ठीक होना हमारे लिए बड़ी राहत है।” — स्थानीय निवासी
जहाँ प्रशासन और संबंधित विभाग इस भीषण गर्मी में मौन साधे हुए थे, वहीं ‘बेहतर झारखंड’ की इस सक्रियता से लोगों को जलसंकट से निपटने के लिए सहयोगी हो रहा है।


