
सीआईडी झारखंड ने अब मामले में अपहरण का केस दर्ज कर लिया है (कांड संख्या 04/2026)। बड़ा सवाल यह है कि जब पहले ही जिले के कई एसपी द्वारा सीआईडी को अनुशंसा भेजी जा चुकी थी, तो अब तक मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ था?
बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के गिरधरटांड़ की रहने वाली 14 वर्षीय सेजल झा 16 अक्टूबर 2020 को ट्यूशन के लिए घर से निकली थी, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटी। घर से कुछ दूरी पर सड़क किनारे उसकी साइकिल लावारिस हालत में मिली थी, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी सेजल झा का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
सेजल की मां उषा झा का कहना है कि वे लगातार पुलिस और सीआईडी दफ्तरों के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन उन्हें हर जगह अलग-अलग जवाब मिला। कभी कहा गया कि केस सीआईडी के पास नहीं है, तो कभी जांच जारी होने की बात कही गई।
अब सीआईडी द्वारा अपहरण का मामला दर्ज किए जाने के बाद केस में नया मोड़ आया है। हालांकि, इतने लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने पर परिवार में नाराजगी भी है। थक-हारकर उषा झा ने उपायुक्त कार्यालय में आवेदन दिया है और चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे हाईकोर्ट का रुख करेंगी।
बोकारो के उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि केस की फाइल और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं—पांच साल में कोई सुराग क्यों नहीं मिला?
सीआईडी ने पहले केस लेने से इनकार क्यों किया? और अब अचानक अपहरण का मामला दर्ज क्यों किया गया?
अब देखना होगा कि क्या पुष्पा महतो केस की तरह सेजल झा मामले में भी सच्चाई सामने आ पाएगी और परिवार को न्याय मिल सकेगा?


