
बोकारो, बेरमो डेस्क: ढोरी स्टाफ क्वार्टर निवासी चंदन चौहान की मां का इलाज के दौरान रांची में निधन हो गया. शनिवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई.
अंतिम यात्रा का एक ऐसा मंज़र जिसके सामने आया वहीं ख़ामोश और ग़मगीन होकर देखता रह गया। मौजूद हर आदमी का मंज़र कुछ पल के लिए ख़ामोश कर दिया. बेटे को जिंदगी का सहारा मानने वाला यह समाज ने अपनी मां की अर्थी को कंधा देकर उनके आख़िरी सफ़र में साथ चलता देख बेटियों के जन्म पर दुखी होने वाले लोग। बेटी के इस काम पर गर्व महसूस कर रहे थे। यह लम्हा सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि मां के प्रति बेटी की अकीदत, मोहब्बत और फ़र्ज़ का ख़ामोश इज़हार बन गया। अर्थी से लिपटी बेटी की नम आंखें मानो अपनी मां को आख़िरी बार भी खुद से जुदा होने नहीं देना चाहती थीं। यह दृश्य वहां मौजूद हर शख़्स के दिल को गहराई तक छू गया। अर्थी के साथ बढ़ते बेटी के कदम मानो उम्रभर मिले स्नेह और ममता को अपना अंतिम सलाम अर्पित कर रहे थे। फ़िज़ा में पसरा सन्नाटा और झुकी हुई निगाहें इस बात की गवाही दे रही थीं कि कुछ रिश्ते अल्फ़ाज़ से नहीं, एहसास से बयां होते हैं।


