
Hamara Bokaro Desk
बोकारो: गोमिया प्रखंड के जरकुंडा स्थित कोनार डैम जलाशय में मंगलवार को उस समय उत्साह का माहौल बन गया, जब मछुआरों के जाल में दो विशालकाय ब्रिकेट मछलियां फंस गईं। इनमें एक मछली का वजन 42 किलोग्राम और दूसरी का 26 किलोग्राम बताया गया है। दोनों मछलियों का आकार इतना बड़ा था कि उन्हें पानी से बाहर निकालने के लिए कई लोगों की मदद लेनी पड़ी।
यह सफलता जरकुंडा मत्स्यजीवी समिति के अध्यक्ष धीरज लहेरी और समिति के सदस्य अशोक महतो, महावीर महतो, जमुना महतो, तापेश्वर महतो एवं देवेंद्र महतो को मिली। जैसे ही बड़ी मछलियां पकड़े जाने की खबर फैली, आसपास के गांवों से लोग उन्हें देखने के लिए जलाशय के किनारे पहुंचने लगे। कई लोगों ने मछलियों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
समिति के अध्यक्ष धीरज लहेरी ने बताया कि कोनार डैम जलाशय में विभिन्न प्रजातियों की बड़ी मछलियां पाई जाती हैं, लेकिन इतनी विशाल मछलियां बहुत कम ही जाल में फंसती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बड़ी मछलियां मिलने से मछुआरों को अच्छी आय होती है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
मछुआरों के अनुसार, कोनार डैम वर्षों से क्षेत्र के लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। यहां बड़ी संख्या में मछुआरे केज कल्चर (पिंजरा विधि) के माध्यम से मत्स्य पालन करते हैं। इससे स्थानीय बाजारों में ताजी मछलियों की आपूर्ति होती है और कई परिवारों का जीवनयापन भी इसी व्यवसाय पर निर्भर है।
मछुआरों का मानना है कि यदि मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाएं और सरकारी सहयोग मिलता रहे तो कोनार डैम क्षेत्र मत्स्य उत्पादन और रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है। मंगलवार को पकड़ी गई 42 और 26 किलो की विशाल मछलियां इस बात का प्रमाण हैं कि कोनार जलाशय आज भी मत्स्य संपदा से भरपूर है।
इस उपलब्धि से मछुआरों में खुशी का माहौल है, वहीं स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताते हुए सभी मछुआरों को बधाई दी।


