बोकारो में उठ रही है न्याय की मांग, चास में कैंडल मार्च

बोकारो के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र का ये मामला बीते 21 जुलाई 2025 का है। किशोरी पुष्पा महतो घर पर यह कह कर निकलती है कि वह कॉलेज नामांकन करवाने के लिए जा रही है। शाम ढलने पर जब नहीं लौटी है तो दोस्तों और सहेलियों से घर वाले पता करते हैं। लेकिन पुष्पा कुमारी का कोई पता नहीं चलता है। 

परिजन के काफी जद्दोजहद के बाद मामले का रिपोर्ट पिंडराजोरा थाना में दर्ज कराया जाता है। SIT का गठन किया जाता है और लगातार खोजबीन 8 महीना तक चलता रहता है। लड़की के माता-पिता लगातार पदाधिकारी के दफ्तर पर चक्कर काटते नजर आते हैं लेकिन कहीं पर फरियाद नहीं सुनी जाती है। जांच के लिए बनी SIT हर सिरे पर फेल होती नजर आती है।

परिजनों के द्वारा छोटे-छोटे दफ्तरों के साथ कई बड़े पदाधिकारी के चौखट पर लगाया गया फरियाद पर भी सुनवाई नहीं होती है, तो लड़की के पिता हाई कोर्ट में फरियाद लगते हैं. 

इसके बाद बोकारो एसपी हरविंदर सिंह के निर्देश पर सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक नई SIT का गठन किया जाता है और आनन फानन में नई SIT नर कंकाल प्राप्त करती है और यह पुष्टि करती है कि यह पुष्पा कुमारी की है। 

अब सवाल यह उठता है की जब नई बनी SIT एक दिन में मामले को सुलझा सकती है तो क्या 8 महीने तक पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी थी? क्या पुलिस प्रयास करती तो पुष्पा को बचाया जा सकता था?

बोकारो पुलिस कप्तान हरविंदर सिंह ने थाना अध्यक्ष के साथ-साथ 28 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इससे पूरे महकमे में खलबली मच गई है। 

स्थानीय लोग मामले में संलिप्त सभी लोगों को कठोर कार्रवाई हो इसको लेकर कैंडल मार्च निकाल रहे हैं। बोकारो में प्रशासनिक रवैया के विरुद्ध लोग सड़क पर उतरने लगे हैं। बोकारो के राजनीतिक गलियारे में हलचल महसूस की जाने लगी है।

बोकारो में सियासी पारा गर्म होने लगा है। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है की क्या मामला कोई मंत्री की बेटी होती तब भी पुलिस का रवैया ऐसा ही रहता?

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